"कड़वी बातें" ..............*.............. कहाँ पर बोलना है, और कहाँ पर बोल जाते हैं। जहाँ खामोश रहना है, वहाँ मुँह खोल जाते हैं।। "..... बहुत ऊँची दुकानों में, तो कटाते जेब सब अपनी। मगर मज़दूर माँगेगा, तो सिक्के बोल जाते हैं।। "..... ब्रांडेड विज्ञापनों के चक्कर मे, तो 100 की चीज 200 मे लाते है । वही सब्जी की बात आए, तो कम कहकर दोबारा तोल जाते है ।। "..... कटा जब शीश सैनिक का, तो हम खामोश रहते हैं। कटा एक सीन पिक्चर का, तो सारे बोल जाते हैं।। "..... अगर मखमल करे गलती, तो कोई कुछ नहीँ कहता। फटी चादर की गलती हो, तो सारे बोल जाते हैं।। "..... हवाओं की तबाही को, तो सभी चुपचाप सहते हैं। च़रागों से हुई गलती, तो सारे बोल जाते हैं।। "..... नयी नस्लों के ये बच्चे, तो जमाने भर की सुनते हैं। मगर माँ बाप कुछ बोले, तो बच्चे बोल जाते हैं।। "..... सोचते है गर्ल फ्रेंड बने नही, तो इज्जत से तक खेल जाते है। अपनी बहन बेटी की बात आए, तो सभी के खून खोल जाते है ।। ".....
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